अन्यारी राता मा
अन्यारी राता मा
तू कैले मेसै बाता
हेर त्यूं भूली
ऊ ह्यूँद व्हाली चूली
चमकन लागि हुली
जन रात गैना
अन्यारी राता मा
तू कैले मेसै बाता
चौख्टीय बाटू हेरि
फिर घिर ऐगे चौमास
यकुली परानु भूलि मेरु
झट छविं लगाण ऐजा
अन्यारी राता मा
तू कैले मेसै बाता
ऊ क्या देलो हैका शुख
वैकु नि रैगे अब अता पता
भैम व्हैगे थे मिथे भूली
झट तू दौड़ी की मै पास ऐजा
अन्यारी राता मा
तू कैले मेसै बाता
बालकृष्ण डी ध्यानी
देवभूमि बद्री-केदारनाथ
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बालकृष्ण डी ध्यानी


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