क्वी नि मेरु पास अब
हो हो औ हो अ
क्वी नि मेरु पास अब
मेरु जीकोडी बोल्दी रैंदी
ये मन मेरा जब माया बसी
इले ई आँखि रुंदी रैंदी
दुक दुक सदनी इन
किले ऊ इनि कैंदी रैंदी
ध्यै किले कैकु बाण
इनि सदनी ऊ देंदी रैंदी
बच्न का कांडा अब
सदनी जिकोड़ो घोच्दो रैंदा
निर्भगी इन मन रे ऊ बान
किले सदनी उल्टो सोच्दो रैंदी
क्वी नि मेरु पास अब
मेरु जीकोडी बोल्दी रैंदी
ये मन मेरा जब माया बसी
इले ई आँखि रुंदी रैंदी
बालकृष्ण डी ध्यानी
देवभूमि बद्री-केदारनाथ
मेरा ब्लोग्स
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बालकृष्ण डी ध्यानी


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