ये लोक
हैंसो त हँसैंण नि दिंदा
ई दुनिया किले मिथे जीण नि दिंदा
जख देका तख भिर भिराण लग्यां
मिथे यखुली ऊ किले नि रैण दिंदा
माया कु मि चखुलु छों आकासा कु
ये आकासा मा मिथे ऊ किले उड्न नि दिंदा
अपरी छविं ईं ऊं सदनी लगान्दा रैंदा
मेरी छविं किले नि ऊ एक बारी सुणदा
हैंसो त हँसैंण नि दिंदा
ई दुनिया किले मिथे जीण नि दिंदा
बालकृष्ण डी ध्यानी
देवभूमि बद्री-केदारनाथ
मेरा ब्लोग्स
http://balkrishna-dhyani.blogspot.in/search/
में पूर्व प्रकाशित -सर्वाधिकार सुरक्षित
बालकृष्ण डी ध्यानी


0 टिप्पणियाँ