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ये लोक



ये लोक

हैंसो त हँसैंण नि दिंदा
ई दुनिया किले मिथे जीण नि दिंदा

जख देका तख भिर भिराण लग्यां
मिथे यखुली ऊ किले नि रैण दिंदा

माया कु मि चखुलु छों आकासा कु
ये आकासा मा मिथे ऊ किले उड्न नि दिंदा

अपरी छविं ईं ऊं सदनी लगान्दा रैंदा
मेरी छविं किले नि ऊ एक बारी सुणदा

हैंसो त हँसैंण नि दिंदा
ई दुनिया किले मिथे जीण नि दिंदा

बालकृष्ण डी ध्यानी
देवभूमि बद्री-केदारनाथ
मेरा ब्लोग्स
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बालकृष्ण डी ध्यानी
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