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मैं अधूर जब भी हो जाऊं



मैं अधूर जब भी हो जाऊं

मैं अधूर जब भी हो जाऊं
तुम तब आके मुझे पूरा कर देना

सात जन्मों की वो प्रियतमा मेरी
हर जन्म में ये वाद तुम जरूर निभा देना

हर सांस पर मेरे अधिकार हो तेरा
ऐसा सिंधुर तुम अपने माथे सजा देना

हर हरे कांच पर तेरी हो खन खन
वो अमर प्रीत गठ बंधन तू गढ़ देना

मैं तेरा तू मेरी कहे ये मंजुल हवा
वो अहसास पल पल दिल में जगा देना

कहना है बस वो प्रित मेरे गीत मेरे
तुम अपनी सारी वो रीत निभा देना

बालकृष्ण डी ध्यानी
देवभूमि बद्री-केदारनाथ
मेरा ब्लोग्स
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बालकृष्ण डी ध्यानी
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