सारी बात बताना चाहता हूँ मैं तुमको
सारी बात बताना चाहता हूँ मैं तुमको
पर कुछ बात मैं अपने आप में अपने से छुपा देता हूँ
तकलीफ ना हो अब तुमको उन से कभी
उन बातों को अब मैं अपने सीने में दबा देता हूँ
आंखें मेरी कहती होंगी तुम्हे शायद कभी कभी
पर उन्हें तुम इसलिये नहीं पढ़ पाती होंगी
मेरी मुस्कान मेरे ही चेहरे की आड़ लिये तब
उन चुपके से बहते आँसूं को तुम से छुप देते होंगे
अंदर ही अंदर वो बातें अब मुझ में गढ़ती जाती है
रोज नये तरीके से वो मुझे अब वो छलती जाती है
अंदर ही अंदर उन बातों से मैं अब खोने लगा हूँ
कभी पूरा था सामने तुम्हारे अब मैं आधा होने लगा हूँ
तोड़ रहा है मेरा रिश्ता तुम संग अब वो धीरे धीरे
मेरे किये की सजा शायद अब मिल रही मुझे धीरे धीरे
अब हिम्मत नहीं होती मेरी तुम्हारे सामने खड़े होने की
वो बात छुपाई मैंने क्यों तुम से अब खुद से पछता रहा हूँ
सारी बात बताना चाहता हूँ मैं तुमको .......................
बालकृष्ण डी ध्यानी
देवभूमि बद्री-केदारनाथ
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