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बस भूलना चाहत हूँ


बस भूलना चाहत हूँ

बस भूलना चाहत हूँ
खुद को खुद से मैं
याद भी मैं खुद को अब ना कर पाऊं
अब मैं खुद को खुद से भूल जाऊं
बस भूलना चाहत हूँ

बस अब धड़कन ही चले साथ मेरे
ना कोई और शोर करे आ के अब पास मेरे
अपने में ही अब मैं रहना चाहत हूँ
दो घड़ी सकून के स्वास बस लेना चाहता हूँ
बस मैं अपने को भूलना चाहत हूँ

कोई मिटा दे मेरी स्मरण शक्ति
बीते पल की ना हो अब मुझ से गिनती
अब तो सुन लो तुम मेरी विनती
सहन नहीं होता अब मुझसे वो पल
बस बहुत हो गया मुझे मुझसे भुला दो

बालकृष्ण डी ध्यानी
देवभूमि बद्री-केदारनाथ
मेरा ब्लोग्स
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बालकृष्ण डी ध्यानी
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