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छुईं मेरो गौं की




छुईं मेरो गौं की

छुईं मेरो गौं की
मेरो नातो मेरो नौं की
छुईं मेरो गौं की ..........

बिन्सरी बेला की घटका
गौड़ बछड़ों की गौळ की घंटा
दूध दही और चै की सुराका
नौंनु उठ जै रे ऐगे देक प्रभाता
छुईं मेरो गौं की ..........

अब त रैगे बस मेरो गौं बस नौं को
कबी कबार फेर फटका और जी सैर को
अब दानों बालों को यूँ गौं मा
बस जी बेटी ब्वारी देखनी सारीयों मा
छुईं मेरो गौं की ..........

अब त जी मिल इतगा ही बोलाण
आपरी सोच थे मिल इतगा ही सिलण
थग्ल्या लग्यां मेर कबिता थे अबैर
जै पैड़ी और्री अपरा थे वैमा नि खोजैण
छुईं मेरो गौं की ..........

बालकृष्ण डी ध्यानी
देवभूमि बद्री-केदारनाथ
मेरा ब्लोग्स
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बालकृष्ण डी ध्यानी
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