जन बग्नि ये गद्नि जी
जन बग्नि ये गद्नि जी
तेर मेरी पिरित जनि वा किलै लगनि जी
हैरा भैरा बाणों का पसरया ये गैणा जी
दिन राति अपरि आन्ख्यों सदनी इनि रैणा जी
जन बग्नि ये गद्नि जी
हात मा हात धरि इनि बैठ्याँ रौंला गैल्या
सुख दुःख अपरि जिंदगी दगडी कट दा रौंला
कटै जाली ये जिंदगी अब त्यारा दगडी जी
माया की गगरी इनि अपरी छौलता रौंला जी
जन बग्नि ये गद्नि जी
तेर मेर छुऊं की ये रंगमत इनि बनि रयां जी
जुगराज मेरो गढ़ मेरो ये देश सदनि रयां जी
प्रेम का ये पंकाल सदनि यख इनि खिल्दा रयां जी
अपरा अपरा से लोक यख सदनि मिल्दा रयां जी
जन बग्नि ये गद्नि जी
तेर मेर गेढ़ सात जन्म सदनि इनि जोड़ी रयां जी
हर जन्म मां मिथे बस मेरो गढ़ देश ही मिल्यां जी
चखुला बनि ये सरगा हम सदनि उडदी रौंला जी
अपरि मातृ भूमि का हम मीठा मीठा गीत गौंला जी
जन बग्नि ये गद्नि जी
बालकृष्ण डी ध्यानी
देवभूमि बद्री-केदारनाथ
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बालकृष्ण डी ध्यानी


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