मिलदि ना मिलदि
मिलदि ना मिलदि
तू ये हता मां निस्ता पाणी जनि रे
तेर ये कँवलि ज्वानि छोरी
ना जै खति इनि रे
मिलदि ना मिलदि ...............
देख ना कैर इतगो बिस्वास
ना घमंड धैर इतगा अपरो पास
चुली जनि तू जली जाली वा आगा की अंगठी रे
बाद मां रै जाली बल बस रखा की ठंडी गठोरी रे
मिलदि ना मिलदि ...............
मेल भाव बड्वो कैथे तर अपरो बनवो
ये तेर ज्वानि झ्कझों मां अब त कैथे तू रिझवो
नि मनलि बात मेरी खुद ही अब पछतेली
माया का मास सुधि इनि तू जब जणा देली
मिलदि ना मिलदि ...............
बुढेरी अब खैंसली खोला दन्त जब कैथे देखेली
बिचोरो जो देखलो भागी जालो क्वी ना तब तेरो पास आलो
तब मेरा बातों की खुद ते याखुली रुवेली
ये बगता कि गलती तब तै थे सदनी सतैली
मिलदि ना मिलदि ...............
बालकृष्ण डी ध्यानी
देवभूमि बद्री-केदारनाथ
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बालकृष्ण डी ध्यानी


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