एक इनि बी परित हुंदी
एक इनि बी परित हुंदी
यूँ डंडीयूँ कंडीयूँ का बाणों दगडी
ये ऊंचा हिमाला का चलूँ दगडी
ये भूमि का भूम्याला का मूल दगडी
एक इनि बी परित हुंदी .........
रंग बिरंगा का यख बिरला फूल खिल्दी
यूँ घटियूं बोग्यालों मा पसरया डलियूँ मां
भांति भांति का चखुला -पाखा उड़ादिन
यख ये निळू विराट सरगा को छाति मां
एक इनि बी परित हुंदी .........
बल मिथे च बस इतगा तुम दगडी बोलणु
रयां तुम अब कख बी पर भूली ना जयां अपरो थे
तुमरो सब कुच यख ही च ये बिणा तुम बी अपुरा छन
ये माटी घाटी डंडी कंडी चलूँ चांटी तुम बिणा जण अपुरा छन
एक इनि बी परित हुंदी .........
अपरी परित तुम बिसरी ना जयां
ये अंख्यों ये जीकोडी और्री गिची से बोल्दी रयां
हम पहाड़ी छों हम थे अपरो उत्तराखंड से परित च
देख इनि बी एक गेड़ी परित की अजाण रीत च
एक इनि बी परित हुंदी .........
बालकृष्ण डी ध्यानी
देवभूमि बद्री-केदारनाथ
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बालकृष्ण डी ध्यानी


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