ये किले की हुँदु
ये किले की हुँदु
क्वी वैथे जणदू ना क्वी वैथे गणदू ना
अपरा अपरी मां लग्यां छन सबी
आँखा छन पर क्वी देख्दू ना
ये किले की हुँदु .....
दुःख पीड़ा जबै अप्डी हुंदी
झट कैकी वा किले कि देखे जांदी जी
दूजै की दुःख पीड़ा देखे की बी हम थे
किले कि वा हम थे देखेंदी ना
ये किले की हुँदु .....
अपरी माता का हम सब लाल छन
विंका आँखूं मा हम आंसूं देख सकदा नि
एक औरि बी माँ छन माता जल्म भूमि
विंका का आँखों का हम आंसूं किले पुस्दा नि
ये किले की हुँदु .....
देख बुरो ना मान्या मेरा दीदों
धैरी की अपरा जीकोडी मां अपरो हाथ सोचा
क्या कैनी च तेर जीकोडी तैसे मैसे
विंकी सुणा वे करम थे ही अपरा पूरा करा
ये किले की हुँदु .....
बालकृष्ण डी ध्यानी
देवभूमि बद्री-केदारनाथ
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बालकृष्ण डी ध्यानी


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