विचारों में .................
विचारों में मेरे हमदम मैं तुम से यूँ ही प्यार कर लूंगा
इसी तरह से मेरे प्यार मैं तुम से मेरी आँखे चार कर लूंगा
विचारों में .................
खता तो मुझ से हुयी अपराधी बस मैं तुम्हरा हूँ
कैसे अधिकार तुम पर जता देता बस उस अपराध का छमा का पार्थी हूँ
विचारों में .................
कभी था मैं तुम्हारी उन शोख अदाओं का दीवाना
नजरों ने कही थी तुम पे वो कविता दिल ने गया था बस वो तरना
विचारों में ................
अभी भी आ जाती तुम मेरे पिछले मोड़ पर छोड़े उन विचारों में
अभी भी खोया हुआ हूँ मैं वहीँ पर उन अनसुलझे विचारों की गाठों पर
विचारों में ................
बालकृष्ण डी ध्यानी
देवभूमि बद्री-केदारनाथ
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बालकृष्ण डी ध्यानी


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