माँ मेरी माँ
माँ मेरी माँ बस ...... मेरी माँ
पल पल अपने आँचल में छुपा ले
पल पल अपनी आँखों में बस ले
मुख से अपनी बोल दे बस इतना ... औ मेरे लला
मैं दौड़ा दौड़ा आ जाऊं
माँ मेरी माँ बस ...... मेरी माँ
सुख ही सुख है माँ पास तेरे
दुःख रहे सदा तुझ से कोसों परे
अनछुये ही तू छु जाये मुझको
पास है तू माँ मेरी ये आधार है मुझको
माँ मेरी माँ बस ...... मेरी माँ
जब तक ना देखों तुझको
तब तक चैन ना आये माँ मेरी मुझको
ये दो अँखियाँ पल पल तुझे देख ने को तरसे
देखों तुझे जैसे ही माँ वो अमृत धारा बन बरसे
माँ मेरी माँ बस ...... मेरी माँ
बालकृष्ण डी ध्यानी
देवभूमि बद्री-केदारनाथ
मेरा ब्लोग्स
http://balkrishna-dhyani.blogspot.in/search/
http://www.merapahadforum.com/
में पूर्व प्रकाशित -सर्वाधिकार
बालकृष्ण डी ध्यानी


0 टिप्पणियाँ