मुझे आता नहीं लिखना
मुझे आता नहीं लिखना
वो मुझे लिखना सिखा रहे है
पकड़ के मेरे दो हाथों को
वो मेरी कलम को चला रहे है
मुझे आता नहीं लिखना .......
अजब है वो दोस्त सखा मेरा
वो कैसे मुझे देखो अपना बना रहे है
शब्दों शब्दों को आकार दे कर अपने
अपनी कल्पना को साकार बना रहा है
मुझे आता नहीं लिखना .......
पन्ना पन्ना भी है उसका
उस पर लिखा सपना भी है उनका
मैं तो हूँ उनका दास वो प्रभु मेरे लिखा कर
मुझे वो जिंदगी जीना सिखा रहे है
मुझे आता नहीं लिखना .......
मैं अज्ञानी प्रभु ज्ञानी मेरे
गुरु बनकर वो मुझे ध्यानी बना रहे है
सब कुछ जो लिखा था मैंने
वो सब मेरे प्रभु लिखा रहे हैं
मुझे आता नहीं लिखना .......
बालकृष्ण डी ध्यानी
देवभूमि बद्री-केदारनाथ
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बालकृष्ण डी ध्यानी


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