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कालका मेल

कालका मेल 

कालका मेल काल का पीछेये छीप गयी 
निर्दयी काल तेथे दया भी नी आयी
कैक बाबा कैका बोई 
कैको दादा ,भुला कैको बीटा
कोई ना कोई छुट गयी 
है काल  तेथे दया भी नी आयी
कालका मेल काल का पीछेये छीप गयी..... 
मनखी खोजन्याँ वाला 
अखां रोना  वाहला 
ग्हिचा ध्यै लगाण वाहला 
हे वीधता तील क्या कई 
बहरू पुरु पारीवार अपरू कैरई
है काल  तेथे दया भी नी आयी
कालका मेल काल का पीछेये छीप गयी...
दोई आशों की बोंद पोड्याई
सरकार तील क्या काई
पचा लाख रोप्या हातोंन धेरई 
आपड नातो तोड़ाई 
है काल  तेथे दया भी नी आयी
कालका मेल काल का पीछेये छीप गयी...
मेरी मनखी रोनीछान 
मेरी आखिं ब्होराई
जब देखी मील है दुरिष्य
मेरी अंतरआत्म रोदायी 




कवी बालकृष्ण डी ध्यानी
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