ADD

एक प्रयाश

एक प्रयाश

गीतों को आपने ढलूँ कैसे
सात सरों एक साथ बंधो कैसे

दुनिया इतनी बड़ी है की
इन कडियों जोड़ों कैसे

दोडावों मै आपने सारे घोड़ों को
सबसे प्रेम का रिश्ता जोड़ों कैसे

बातों बातों मै बात निकली
बात ये दोर तक जाईगी

जायेगी दूर तक ठीक है
पर कहीं गुम ना हो जाये

मुख से निकले बोलों को
सार्थकता तक पहुँचों कैसे

बातों से बात आखर जाती
हम दम मेरे ये मेरे दोस्त

सब को एक माला मै पिरऊँ कैसे
जीवन का अर्थ समजाओं कैसे

माया मै फंसे मुशफिर हैं सभी
इन सभीओं को रह दिखाओ कैसे

गीतों को आपने ढलूँ कैसे
सात सरों एक साथ बंधो कैसे 
कवी बालकृष्ण डी ध्यानी
Reactions

एक टिप्पणी भेजें

0 टिप्पणियाँ