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मी थै च याद ...............

मी थै च याद ...............


मयारू उत्तराखंड नयारू उत्तराखंड
भारत को आभींगा अंग 
स्वर्ग से प्यारु ये मेरु खंड 

देव भूमी च मेरी आती प्यारी 
बद्री केदार बाबा येंका दुआरी 
ऋषी मुनियों की अम्रीत  वाणी 
उत्तराखंड की गाथा पुराणी

मयारू उत्तराखंड नयारू उत्तराखंड
भारत को आभींगा अंग 
स्वर्ग से प्यारु ये मेरु खंड 

भगीरथ की यीँ नगरी 
बड़ी च या स्वाणी पीत्रून को मोक्ष बाण 
स्वर्ग थै गंगा जी उतारी 
शंकर जी कु घरु माँ नंदा को मैतु

मयारू उत्तराखंड नयारू उत्तराखंड
भारत को आभींगा अंग 
स्वर्ग से प्यारु ये मेरु खंड 

अलखनंद भागीरथी कु अलख संगम
गंगोत्री जमनोत्री को मिलन 
रूद्र  प्रयाग  ऋषी-केशा बारी
हरी द्वार गड्वाला पहीली द्वारी 

मयारू उत्तराखंड नयारू उत्तराखंड
भारत को आभींगा अंग 
स्वर्ग से प्यारु ये मेरु खंड 

चोदह जिलों को मयारू राज्य 
मी थै  मीलीगे ये साम्राज्य 
उत्ताराखंड़ अन्दोलों मा सहीद होग्यानी 
वों सपूत थै म्यरु प्रणाम 

मयारू उत्तराखंड नयारू उत्तराखंड
स्वर्ग से प्यारु ये मेरु खंड 

रामी बुअरनी की गाथा 
तीलू रुतीली जशी का गीत 
नारी शक्ती को भी मीली मान 
ओं का बाण मी बनू  महँन

मयारू उत्तराखंड नयारू उत्तराखंड
भारत को आभींगा अंग 
स्वर्ग से प्यारु ये मेरु खंड 

उत्तराखंड इतीहास की च बात 
वीर जवानों की सपोतों की याद
गडवाल रयफल को जज्बात 
लैंशडोन हमरा चुँटी च की अलग शान 

मयारू उत्तराखंड नयारू उत्तराखंड
भारत को आभींगा अंग 
स्वर्ग से प्यारु ये मेरु खंड 

गोपाल बाबु गोस्वामी  गीतों की याद 
नरेंदर सिंग नेगीजी क्या बात 
जसपाल राणा निशाणु साधा 
स्वत्रन्त्र  सेनानी यूँ को त्यागा मी थै च याद 

मयारू उत्तराखंड नयारू उत्तराखंड
भारत को आभींगा अंग 
स्वर्ग से प्यारु ये मेरु खंड 


बालकृष्ण डी ध्यानी 
देवभूमी बद्री केदार नाथ 

कवी बालकृष्ण डी ध्यानी
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