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कैसा खेला पैंषा का



कैसा खेला पैंषा का

कैसा खेला पैंषा का कैसा खेला पैंषा का
पैंषा से खेला तुने या पैंषा नै तुझ से खेला 
लागत है जीवन ही लोगों का अब बस है पैंषा 
देख चलन पैंषा का यहाँ सब पैंषा का खेला

मेला ये दुनिया का यांह चला रहा है पैंषा
बनाकर तुझ को तमाशा ताली बजा रहा पैंषा
तुझ को नाच नचाकर धूम मचा रहा पैंषा
खुद मादरी बनकर खेल जमा रहा पैंषा
देख चलन पैंषा का यहाँ सब पैंषा का खेला   

रीशतै नातों से बढकर आज सज रहा पैंषा 
प्रेम का बंधन बंटा रह रहा मै खड़ा आज पैंषा 
आओ इसकी बात सुनावो इस चक्र से अवगत करवों 
इस पैंषा से मै तुम्हे आज मीलावो 
देख चलन पैंषा का यहाँ सब पैंषा का खेला   

जनता के हाथ मै आज खुजराह पैंषा
नेता की जेब मै देखो आज जा रहा पैंषा 
गरीब को और गरीब आज बना रहा  पैंषा
अमीरी को आज  खुब हंसह रहा पैंषा 
देख चलन पैंषा का यहाँ सब पैंषा का खेला

अपने पराये का भेद बता रह पैंषा 
अश्कों मै डूब रहा मदीरा मै बह रहा पैंषा
खुन के  बजाय धम्नीयुं आज बहरह  पैंषा
दूर खड अकेले अकेले देखू मुश्कारा रह पैंषा 
देख चलन पैंषा का यहाँ सब पैंषा का खेला

जनम जब इस जहँ तू  लोभ लगाये पैंषा 
माया के जंजाल मै तुझे फंसाये  पैंषा 
हरपल जीन्दगी के अब तुझे रस आये पैंषा  
पुरी उम्र अब तुझे लालचये बस पैंषा  
देख चलन पैंषा का यहाँ सब पैंषा का खेला

जवानी की दहलीज़ पर भी साथ खड तेरा पैंषा  
माँ बाप की परवरीश मै भी आज लगा पैंषा  
जीवन संगनी लाने मै भी तुझे लगा यांह  पैंषा  
हनी मून मै भी तेरे साथ साथ आये ये पैंषा  
देख चलन पैंषा का यहाँ सब पैंषा का खेला

जीवन के नीरवाहा मै यांह लगता है पैंषा  
प्यार भी बीकत है अगर तेरे पास है पैंषा  
ख़तम होवा महीना तू तुझे सतये  पैंषा  
तनख्वह की तरीक तुझे याद दीलये पैंषा  
देख चलन पैंषा का यहाँ सब पैंषा का खेला

सारी खुशीयुं का राज यांह आज बन बस पैंषा  
बुदापे मै आज दवाइयां भी आज खाये पैंषा  
पानी पीनै पर भी आज यांह लगता  पैंषा  
महंगाई का देखो कैसा साथ नीभा रह  पैंषा  
देख चलन पैंषा का यहाँ सब पैंषा का खेला

मजबोरी का यंहा पर दावा लगाये पैंषा  
व्यर्थ ही अपने को कभी आज उड़ाये   पैंषा  
भूख मै कभी ये  खुब शोर मचये  पैंषा  
भर पेट खाके कभी खुब  सुलाये पैंषा 
देख चलन पैंषा का यहाँ सब पैंषा का खेला

तन मन पर भी अब खुब छये ये  पैंषा 
अगर ना हो तू क्या क्या  खेल देखाये पैंषा 
आबरू को भी बीच बाज़ार आज उतारे ये पैंषा 
एक रोटी के लिया कीतानूं को  तरसा ये पैंषा 
देख चलन पैंषा का यहाँ सब पैंषा का खेला

आने मै भी लगा था  पैंषा जाने मै भी लगैग  पैंषा 
आज कल आज को भी ना छुड आजपैंषा 
तेरे पलने और तेरे चीता की लकड़ी को भी लगा  पैंषा 
प्यार इमांन से बढकर अब इस कलयुग मै  है  पैंषा 
देख चलन पैंषा का यहाँ सब पैंषा का खेला

कैसा खेला पैंषा का कैसा खेला पैंषा का
पैंषा से खेला तुने या पैंषा नै तुझ से खेला 
लागत है जीवन ही लोगों का अब बस है पैंषा 
देख चलन पैंषा का यहाँ सब पैंषा का खेला

बालकृष्ण डी ध्यानी 
देवभूमि बद्री-केदारनाथ 



कवी बालकृष्ण डी ध्यानी
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