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जब आयी चीट्ठी


जब आयी चीट्ठी 

बुअड को  छपलाट
बुअडी को घपलाट 
भगवती को मंडण
दुईगती को कुथीग जाण 

गवा मा फ़ैल गये ये बात 
अब बल की होला आज
बुअड बुअडी की बारात 
जाणी भानडया बरसों बाद
भगवती को मंडण...

बाल कुवंरी को थाण 
डंडा टुक कु जाण
यूँ उकल थै बोई 
बुअडी कंण चडल
भगवती को मंडण...

सब विचार करन छ आजा 
बार्ड थै खाक भाटी आयी विचार
माँ बुअडी को सप्नियुं मा आयी 
आपरी माँ नै झलक दीखे 
भगवती को मंडण...

माँ की शक्ती आपरमपार 
बुअड बुअडी पुहंच गे
भगवती कु दरबार 
बुअडी बुअड जयकार लगाई
भगवती को मंडण...

कुथीग मा कंण आयी बहर
बुअडी चरखी मा बैठी बार बार                   
बुअड जलेबी चटकई ये बार
बुडी आंखी छलकी ये बार
भगवती को मंडण...

कण भानडया दिनों बाद 
बौडी का बाण बड़ा थै आयी प्यार 
नुँना नुँनी की चीट्ठी आयी ये बार 
बल आण छण घार ये बार 
भगवती को मंडण...

बुअड कु खुशी का ना ठरू
गीत लगाई आब की बार 
बसंत आणी च फिर दूर 
भाटिक तूँ चूँ डणदीयूँ पार  
भगवती को मंडण...

बुअड को  छपलाट
बुअडी को घपलाट 
भगवती को मंडण
दुईगती को कुथीग जाण 

बालकृष्ण डी ध्यानी
देवभूमि बद्री-केदारनाथ 



कवी बालकृष्ण डी ध्यानी
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