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मील क्या कंण अब ?


मील क्या कंण अब ?

अब क्य ब्योलण
अब क्य सोचण 
जीनदागी अब यख याणी ही चलण
बिरला कुकर की जात 
अब हम पर भूकणी 
अब क्य ब्योलण...........................

मेरु जीवण याणी बदरंग 
खीलण कभी ये बाग़ मा ना फुल यख
मेरु कुडू माटा कुडू ये भुला 
मीले केले ध्यै लगण आज यख
अब क्य ब्योलण...........................

क्य मी बोलु
गीच मी खोलु अब क्या होलु अब यख 
गीत म्यार बल्दों सी 
मी थै लगणी च लगाम यख
अब क्य ब्योलण...........................

यखार सी मयारू गुजरू 
कुछ मयारू सरू बल अब यख
कणडयाली साग भी अब मी थै दीखंदी कांडा यख 
मेरी धरती मा मी ही हुयीगों अब गहरु यख 
अब क्य ब्योलण...........................

सरकार मेरी मी थै ही घेरे 
उज्वालों मा रहगी सदाणी
मेरा भागम ये मेरा देबत 
सादणी रहाणी अंधेर अब 
अब क्य ब्योलण...........................

मेरी पीड़ा मील ही जाणी
कै मा लगाणी मेरी खैरी 
मी बोलादु भी कै मा हे भूमी 
जो मी थै छुडी की विदेश गयांछन  
अब क्य ब्योलण...........................

अब क्य ब्योलण
अब क्य सोचण 
जीनदागी अब यख याणी ही चलण
बिरला कुकर की जात 
अब हम पर भूकणी 
अब क्य ब्योलण...........................


बालकृष्ण डी ध्यानी
देवभूमि बद्री-केदार नाथ 
मेरा ब्लोग्स 
http:// balkrishna_dhyani.blogspot.com
मै पूर्व प्रकाशीत हैं -सर्वाधिकार सुरक्षीत


कवी बालकृष्ण डी ध्यानी 
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