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रोल्यों का डुहंगा गद्न्युन का गारा


रोल्यों का डुहंगा गद्न्युन का गारा 

ये मेरी बोई ये मेरा पहाड़ 
रोल्यों का डुहंगा गद्न्युन का गारा 
कंण चमकी ये घाम हिमाल
डंडी कंडी को ये गड हमारा 
ये मेरी बोई ये मेरा पहाड़ ........

कह्दु मेरु मन को कबी विलास 
पाखी बाणु मी उडु अकाशा
घमू फिरू ये मेरा डाणड़
मीलालु क्या मी थै येसा भागा
ये मेरी बोई ये मेरा पहाड़ ........

देबतों की भूमी ये मेरा कैलाश 
कुल देबता पुजी पूर्वज हमारा 
देबत को माण मान हिमाल 
मंडण को भगवती को सारा 
ये मेरी बोई ये मेरा पहाड़ ........

हीशोलों को झाडा कांटों का बड़ा 
कदु की रोटी ,प्याज की पुगणडी 
दर मंदर तेबारी छणी घुठ्यार
गुड गुड लगण दी बारड़ हुड्की 
ये मेरी बोई ये मेरा पहाड़ ........

खील्दा फुल मेरे बसंत बहारा
सुण भादों मा बरखा को धारा
काफल लाग्यां ऊँचा हीवाल
कुथीग जाणा गती बार मास 
ये मेरी बोई ये मेरा पहाड़ ........

दीदी भूली और भूलह च साथ 
मी थै आणी च माजी की याद 
कण रायुं मी यख यकुली आज 
बरसाणी च ये आंखी भी आज
ये मेरी बोई ये मेरा पहाड़ ........

घुघूती को घुरू ये मेरा डला 
ये मेरे मन को डरु मेरा घरा
प्रीत का तिश अब मी जंडूद
भूकी पोटी कीले मी रहेंणदु
ये मेरी बोई ये मेरा पहाड़ ........

ये मेरी बोई ये मेरा पहाड़ 
रोल्यों का डुहंगा गद्न्युन का गारा 
कंण चमकी ये घाम हिमाल
डंडी कंडी को ये गड हमारा 
ये मेरी बोई ये मेरा पहाड़ .......

बालकृष्ण डी ध्यानी
देवभूमि बद्री-केदार नाथ 
मेरा ब्लोग्स 
http:// balkrishna_dhyani.blogspot.com
मै पूर्व प्रकाशीत हैं -सर्वाधिकार सुरक्षीत

कवी बालकृष्ण डी ध्यानी
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