एक याद शम्मी कपुर के साथ
फिर ये आखें नम हुयी
जो बता मेरे संग होई
प्रभात ही प्रभात मै
शम्मी जी अब हमारे संग नहीं
युवा की जवां धड़कन
उनका अंदाजे बयां
अब कीसी के बस नहीं
अब ओ इस जग मै नहीं
उनकी अब याद
इस दिल मै रहीगी
उनकी कमी हर
दिल को खले गी
कश्मीर की कली ना अब खेलेगी
याहू हूँ का वू जादू
सर चढ़ के बोला
आहा आज आहा आज
हर मन डोला
तीसरी मंजील अब ना रही
ब्रहमचारी से प्रोफेषर बना
दिल देके जंगली देखो
इन एवेनिंग इन पेरिश
का अब लट साहब ना रहा
अकेले अकेले कंहा चले गये
फिर ये आखें नम हुयी
जो बता मेरे संग होई
प्रभात ही प्रभात मै
शम्मी जी अब हमारे संग नहीं
बालकृष्ण डी ध्यानी
देवभूमि बद्री-केदारनाथ
कवी बालकृष्ण डी ध्यानी


0 टिप्पणियाँ