ताश
हे दीदा मेरा दीदा
ताश पीस दे
ताश का दगड दीदा
कटुमदरी पीस गे
हे दीदा मेरा दीदा
बावन पतों को राज्य
चार जोकर भी साथ
खेलण च देखो आज
भूले की सब बात
हे बुअड़ मेरा बुअड़
ताश पीस दे
सबेरा ब्य्खोनी शाम
त्यारू लग्युं दरबार
बाजी मा बाजी लगी च
टकों हर जीत लगी च
हे भूलह मेरा भूलह
ताश पीस दे
तेरी मान णी भरे भैजी
यी जुवा की लतमा
घर पुन्गाडी सब बीकी गे
मावशी बर्बाद हुये गे
हे चचा मेरा चचा
ताश पीस दे
मेरी दीदी भूली
की याद ती थै ना ये
टुंडा दारू मा
तू सदणी पुडी रे
हे ममा मेरा ममा
ताश पीस दे
अब भी संभल जावा
दीदो मावशी ना गवाव्
पतों का साथ छुडा
कटुमदरी निभाव
हे दीदा मेरा दीदा
अब त सुधरी जावा
म्यार गड देश
सुन्दर तुम बनवा
हे दीदा मेरा दीदा
अब त सुधरी जावा
बालकृष्ण डी ध्यानी
देवभूमि बद्री-केदारनाथ
मेरा ब्लोग्स
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मै पूर्व प्रकाशीत हैं -सर्वाधिकार सुरक्षीत
कवी बालकृष्ण डी ध्यानी


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