माँ मेरी
मै हों कन्या
मे नै देखा बंद आँखों से
दुनीया खुली आँखों से ना देख पाई
जैसे गर्भ मे बच्चे की
माँ सीस्कीयाँ ना सुन पाई
ओ भी तु रोता होगा माँ
माँ का अंचल बीघोता होगा
सहयात के लिया कीसी पुकारता तु होगा मा
जब अपनु नै कीया घात
मेरा कार दिया गर्भ-पात
अब क्या रहा गयी बात
माँ मेरी तुझ को मुझ पर
थोड़ी दया भी ना आयी
जाग से मेरी क्रर दी रुस वाई
लड़के के लिये मै दु बधाई
क्यूँ कन्या ना इस जाग भायी
मे नै देखा बंद आँखों से
दुनीया खुली आँखों से ना देख पाई
बालकृष्ण डी ध्यानी
देवभूमि बद्री-केदारनाथ
मेरा ब्लोग्स
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मै पूर्व प्रकाशीत हैं -सर्वाधिकार सुरक्षीत
कवी बालकृष्ण डी ध्यानी


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