जाणी जाणी कखक जाणी
पहाड़ टुका जाके भंया भुर जाणी
मैला खोल कभी तैल खोल जाणी
सोच देखा कखक भाटे कखक जाणी
जाणी जाणी कखक जाणी .......
अपरी कभी गैर हो जाणी
कभी कभी ये मोल खाणी
कभी सैणी सी छुयीं लगाणी
कभी अपरू परयु भेद बताणी
जाणी जाणी कखक जाणी .......
जूता पोटका मुख लोकाणी
बघा सी देखा दहाड़ लगाणी
माया पीछा दोउड़ लगाणी
यकुली खडी वो शरमाणी
जाणी जाणी कखक जाणी .......
जाणी ल भी अब तक णी जाणी
क्या कहणी वा सुननाणी
बीता दीणो व बात पूराणी
एक राजा एक थी राणी
जाणी जाणी कखक जाणी .......
पहाड़ टुका जाके भंया भुर जाणी
मैला खोल कभी तैल खोल जाणी
सोच देखा कखक भाटे कखक जाणी
जाणी जाणी कखक जाणी .......
बालकृष्ण डी ध्यानी
देवभूमि बद्री-केदारनाथ
मेरा ब्लोग्स
http:// balkrishna_dhyani.blogspot.com
मै पूर्व प्रकाशीत हैं -सर्वाधिकार सुरक्षीत
कवी बालकृष्ण डी ध्यानी

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