ADD

ढलती रात



उस ढलती रात के बाजों मै 
बदल को ओढ़ कर चली जा रही हो !!
एक बार मुड़कर देखो जरा 
क्यों चेहरा छुपा कर जा रही हो !!

बालकृष्ण डी ध्यानी
Reactions

एक टिप्पणी भेजें

0 टिप्पणियाँ