
मन मयारू
मनख्यूं को पराणु रोदयाई
छुंयीं कानुडी जब सुणली
मन मयारू उदास व्हैग्याई
हे विपदा खैरी दोई भैन मेरी
कण आपदा यख अब ऐग्याई
मन मयारू उदास व्हैग्याई
रुंदी रैंदु सस्कंदु रैंदु गालो मा
पड़ग्या फिनका अन्खोंयुमा
मन मयारू उदास व्हैग्याई
यकुली हन्दू जख मी हन्दू
रात दीण यख यकुली सैर ग्याई
मन मयारू उदास व्हैग्याई
कथा मेरी मी मीथै खैच्णु
ढंगी सी मीच मीथै सराणु
मन मयारू उदास व्हैग्याई
छनी मेरी ऐरे मेर दगडया
तू भी अब क्ख्क लुकी गयाई
मन मयारू उदास व्हैग्याई
मनख्यूं को पराणु रोदयाई
छुंयीं कानुडी जब सुणली
मन मयारू उदास व्हैग्याई
बालकृष्ण डी ध्यानी
देवभूमि बद्री-केदारनाथ
मेरा ब्लोग्स
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मै पूर्व प्रकाशीत हैं -सर्वाधिकार सुरक्षीत
बालकृष्ण डी ध्यानी

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