
चल रै दीदा चल
मी छुं गड्वाली माटा को
जाणु छुं मी पुंगड़ा जुयतणा को
लल्या कल्या की जोड़ी बल्दों की
डाली खिलेली च्वोंलों की
मी छुं उत्तराखंडी मी छुं उत्तराखंडी
देखणा छुं तुम मेरु मान
मी किसान छों येकू अभिमान
ये भतीक मीलालु मीथै धान
मीथै मीलालु येकू मान
मी छुं उत्तराखंडी मी छुं उत्तराखंडी
तंण ताणा छ मेरा भूयाँ
तवा मुछुं पर तुम भी लीयाँ
हाथ मेरा हाथों मा लीयाँ
पह्ड़ा छुडी क्ख्की णा जयँ
मी छुं उत्तराखंडी मी छुं उत्तराखंडी
देख मेरु चाल ढाल
हिल जाणु च ऐ पह्ड़ा
मील तर बोल्याली दीदा
अब च तुम्हर बार
मी छुं उत्तराखंडी मी छुं उत्तराखंडी
मी छुं गड्वाली माटा को
जाणु छुं मी पुंगड़ा जुयतणा को
लल्या कल्या की जोड़ी बल्दों की
डाली खिलेली च्वोंलों की
मी छुं उत्तराखंडी मी छुं उत्तराखंडी
बालकृष्ण डी ध्यानी
देवभूमि बद्री-केदारनाथ
मेरा ब्लोग्स
http:// balkrishna_dhyani.blogspot.com
मै पूर्व प्रकाशीत हैं -सर्वाधिकार सुरक्षीत
बालकृष्ण डी ध्यानी

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