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कर विचार


कर विचार 

इन नी मिलदु 
सुख नी सुखदु 
दुःख नी सरदू 
आपरा थै भूली 
भैर क्ख्क रैयाँदु 
इन नी मिलदु 
सुख नी सुखदु 
दुःख नी सरदू 

फिरदी रैंद रै
जुनी सी चखुली 
बाण ऐ बन मा
ऐ जंद देर सवेर 
अंशुं भी ऐ मन मा 
इन नी मिलदु 
सुख नी सुखदु 
दुःख नी सरदू 

उकाली कु उकाला 
नी केंटेंदू नी भुल्दु रै 
उंधारु कु उधारु 
चढ़दी जंद नी चुकेदू रै 
इन नी मिलदु 
सुख नी सुखदु 
दुःख नी सरदू 

अपरा थै रूले की 
यकुली यकला छुडैकी 
माया आला भी जाली 
जो माया छुडैकी गै
कब कंण परती आली 
इन नी मिलदु 
सुख नी सुखदु 
दुःख नी सरदू 

इन नी मिलदु 
सुख नी सुखदु 
दुःख नी सरदू 
आपरा थै भूली 
भैर क्ख्क रैयाँदु 
इन नी मिलदु 
सुख नी सुखदु 
दुःख नी सरदू 

एक उत्तराखंडी 

बालकृष्ण डी ध्यानी
देवभूमि बद्री-केदारनाथ
मेरा ब्लोग्स
http:// balkrishna_dhyani.blogspot.com
मै पूर्व प्रकाशीत हैं -सर्वाधिकार सुरक्षीत

आभार
फूटो http://www.merapahadforum.com/

बालकृष्ण डी ध्यानी
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