ADD

माया तज मिलेंगे हरी


माया तज मिलेंगे हरी 

काश ऐसा होता 
वो मिलता मुझे रहा गुजर 
धीमी सी रोशनी 
होता मुझसे वो रूबरू 
काश ऐसा होता 
वो मिलता मुझे रहा गुजर 

पूछाता मै उससे 
सोने के चांदी के सिक्के मे 
बसी है क्या भक्ती तेरी 
आप को मनाने आते क्यों दर पर वो हर बरस 
काश ऐसा होता 
वो मिलता मुझे रहा गुजर 

घर मे नहीं देव 
मन उनका बड़ा उदास यंहा 
आंखें होकर भी आँखों में नूर कंहा 
जरुरतमंद को छोड़ क्यों आते आपकी ओर 
काश ऐसा होता 
वो मिलता मुझे रहा गुजर 

दिल मे बसा है ओर लालच यंहा 
देव मेरे बस मुझे सुख ओर सुख दे 
दूसरों के दुःख के आंसूं रुलकर 
तन पर आपना बस स्वर्ण ले चड़ा
काश ऐसा होता 
वो मिलता मुझे रहा गुजर 

पथ मे पथिक खोजे क्यों उसे 
वो हर मन हर तन मे बसे मेरे हरी 
ना लालच दिखा उन्हें माया जो उन्होंने रचाई 
माया को जब तजेगा तब ही गले लगायेंगे हरी 
काश ऐसा होता 
वो मिलता मुझे रहा गुजर 

काश ऐसा होता 
वो मिलता मुझे रहा गुजर 
धीमी सी रोशनी 
होता मुझसे वो रूबरू 
काश ऐसा होता 
वो मिलता मुझे रहा गुजर 

शुक्रवार दिनांक १२ /१० /१२ सवेरे ०८ :५९ समय

एक उत्तराखंडी 

बालकृष्ण डी ध्यानी
देवभूमि बद्री-केदारनाथ
मेरा ब्लोग्स
http:// balkrishna_dhyani.blogspot.com
मै पूर्व प्रकाशीत हैं -सर्वाधिकार सुरक्षीत

बालकृष्ण डी ध्यानी
Reactions

एक टिप्पणी भेजें

0 टिप्पणियाँ