
कर्म की गति
अग्ने पिछने दिखी जाली
कन दबी की दबी राली
भली चीज च की बुरी
कन रुप्णी जमी राली
अग्ने पिछने दिखी जाली
कन दबी की दबी राली ….
कन छुप दा कन छुपी राली
कर्म का धगा जब छुटी जाला
तुमरों बुत्युं बियाला आला
अँकुरित हो कथा लगला
अग्ने पिछने दिखी जाली
कन दबी की दबी राली ….
तेरु अहम तेरु अहंकार
माया नी रचूँ तेरु वार पार
सै कन तू ऐ घोड़ा पर सवार
सेन्दा सेन्दा जब बिजी जाली
अग्ने पिछने दिखी जाली
कन दबी की दबी राली ….
डाला डाला पाता पाता
हरी की नी सुन तिल अवाजा
अब क्या वहई तेरु साथा
उमरी का ऐगे आखरी पड़वा
अग्ने पिछने दिखी जाली
कन दबी की दबी राली ….
कर्म की गति निरली रै भाई
कै बगत भी वा समण आली
कै लठयाला रुलाली
कै भाग्यंना वा हंसली
अग्ने पिछने दिखी जाली
कन दबी की दबी राली ….
एक उत्तराखंडी
बालकृष्ण डी ध्यानी
देवभूमि बद्री-केदारनाथ
मेरा ब्लोग्स
http:// balkrishna_dhyani.blogspot.com
मै पूर्व प्रकाशीत हैं -सर्वाधिकार सुरक्षीत
बालकृष्ण डी ध्यानी

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