
मै हकीकत हूँ
मै झूठ भी हूँ मै सत्य भी
मै राग भी मै द्वेष भी
मै आज भी मै अब भी और मै कल भी
मै सर्वत्र विदयामान हूँ
मै हकीकत हूँ
चरा चर मै फ़ैली है
मेरी ही अनुकम्पा विख्यात
अखंड मेरी भूमी अखंड है आकाश
कल कल जल निरंतर मै बहता
मै हकीकत हूँ
विहंगों के उमंग में
फूलों के सुगंध रंग में
पडी मेरी छाया
फ़ैल जहाँ तक उजाला
मै हकीकत हूँ
मिथ्या लुपित दो पल
सच संग मै हूँ हर पल
मेरे उजागर हर कोना
मुझको ना तुम खोना
मै हकीकत हूँ
मै पहचान तेरी
मै तेरा मान सन्मान
मै ही हूँ तेर बाद भी
मै ही सदा तेरे साथ ही
मै हकीकत हूँ
एक उत्तराखंडी
बालकृष्ण डी ध्यानी
देवभूमि बद्री-केदारनाथ
मेरा ब्लोग्स
http:// balkrishna_dhyani.blogspot.com
मै पूर्व प्रकाशीत हैं -सर्वाधिकार सुरक्षीत
बालकृष्ण डी ध्यानी

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