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हे स्वार्थ की फेरी


हे स्वार्थ की फेरी 

अपरा अपरा मा लग्या सब 
दुसरा का बार मा कू सुच दू यख 
सोच दो त सोच्दु भुल्हा कोई यख 
कुछ ना कुछ तब दडयूँ व्हालो वख 

हे स्वार्थ की फेरी 
अलग ही तेर क्यारी देखे हैरी भैरी - भैरी 
आत उकालो सी खैरी बस गैरी - गैरी 
हे स्वार्थ की फेरी 

सब बोल्दा बोल्दा ही रैहन्दा
चरखा बगत को चलद ही रैंदा
उपरी माया का सुख मेरा भुल्हा 
जिकोडी पडी दुःख को गैन ऐ कैल ने गिनना 

हे स्वार्थ तेरु ना जी ना परण
उड़ादू रैंदू पंख पसैरीकी 
तेरु को ना सीमा ना सीमा ज्ञान 
हे स्वार्थ तेरु ना जी ना परण

देख की भी अनदेखी कैर कै भी 
तिल तेर भग्या लेखा से ज्याद नी पाई 
फिर किले कै तिल सीखेसैरी
जाम आज नी क्दगा पैल च्या मौरी 

अपरा अपरा मा लग्या सब 
दुसरा का बार मा कू सुच दू यख 
सोच दो त सोच्दु भुल्हा कोई यख 
कुछ ना कुछ तब दडयूँ व्हालो वख 

एक उत्तराखंडी 

बालकृष्ण डी ध्यानी 
देवभूमि बद्री-केदारनाथ 
मेरा ब्लोग्स 
http:// balkrishna_dhyani.blogspot.com 
मै पूर्व प्रकाशीत हैं -सर्वाधिकार सुरक्षीत 

बालकृष्ण डी ध्यानी
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