
उठो मन मेरे प्रभु चरण
स्वामी नारयण हरी हरी
बद्री नारयण हरी हरी
उठो मन मेरे प्रभु चरण
सुबह सुबह की बेला है जाग जावो हरी
मुख खोलो बस बोलो हरी हरी
उठो मन मेरे प्रभु चरण
स्वामी नारयण हरी हरी
बद्री नारयण हरी हरी
उठो मन मेरे प्रभु चरण
एक हरी ही जग समय त्रीगुण रूप माया स्वरूप
उस माया रहीत है हरी हरी
उठो मन मेरे प्रभु चरण
स्वामी नारयण हरी हरी
बद्री नारयण हरी हरी
उठो मन मेरे प्रभु चरण
घट घट में विरजे प्रभु मेरे
हर वस्तु हर जीव हर नर्जिव अवतरित है हरी
उठो मन मेरे प्रभु चरण
स्वामी नारयण हरी हरी
बद्री नारयण हरी हरी
उठो मन मेरे प्रभु चरण
दुःख ना हो किसी को भी जान करा अनजान ही
हर मन के मंदिर में मुस्कुराये मेरे हरी
उठो मन मेरे प्रभु चरण
स्वामी नारयण हरी हरी
बद्री नारयण हरी हरी
उठो मन मेरे प्रभु चरण
एक उत्तराखंडी
बालकृष्ण डी ध्यानी
देवभूमि बद्री-केदारनाथ
मेरा ब्लोग्स
http:// balkrishna_dhyani.blogspot.com
मै पूर्व प्रकाशीत हैं -सर्वाधिकार सुरक्षीत
बालकृष्ण डी ध्यानी

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