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एक ही सड़क



एक ही सड़क

मै था मेरे में
या में था मेरे मै
उससे जुड़ी थी में और मै की एक ही सड़क

सोचते रहा मै
या सोचने सोचा मुझे
उस सोच की एक ही सड़क

लगा रहा मै
या उसने लगने दिया
उससे लगी एक ही सड़क

उलझा रहा ऐसे
या उसने उलझा दिया
उस से उलझी होई एक ही सड़क

किस्सा ऐ पुराना
या पुराने किस्से में मै
उस किस्से वाली एक ही सड़क

बस ऐ तो बड़ गया
या मै फिर घट गया
उस में बसी एक ही सड़क

देख सूरज उगा
या फिर रात ढल गयी
उसे दिखने वाली एक ही सड़क

इसी कशमकश में हूँ
या तू उसी पथ पर है खड़ा
इसी से बनी एक ही सड़क

मै था मेरे में
या में था मेरे मै
उससे जुड़ी थी में और मै की एक ही सड़क

एक उत्तराखंडी

बालकृष्ण डी ध्यानी
देवभूमि बद्री-केदारनाथ
मेरा ब्लोग्स
http:// balkrishna_dhyani.blogspot.com
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बालकृष्ण डी ध्यानी
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