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ग्लास भरी जिन्दगी



ग्लास भरी जिन्दगी

ग्लास भरी ऐ मेरी जिन्दगी
कभी तो तू मुझसे बाते करेगी

जिन्दगी अब हिला हिला के गुजरेगी
दो बूँद पी कर या पिला के गुजरेगी
ग्लास भरी ऐ मेरी जिन्दगी .........................

दर्द का अहसास यूँ चुब सा जायेगा
अकेले में चुपके से वो भी अब अँधेरे में गुन-गुनायेगा
ग्लास भरी ऐ मेरी जिन्दगी ..........................

आँखों मै उभर कर वो जब छलक जायेगी
हंसायेगी कभी तो कभी वो रुला जायेगी
ग्लास भरी ऐ मेरी जिन्दगी .........................

सकुन था जो वो चुरा के ले जायेगी
सांसों से ही अब तू बस नजर मे आयेगी
ग्लास भरी ऐ मेरी जिन्दगी .........................

दर्पण में यादों की धुंद जब छा जायेगी
दो बूंद शराब में यूँ ही वो बह जायेगी
ग्लास भरी ऐ मेरी जिन्दगी .........................

ग्लास भरी ऐ मेरी जिन्दगी
कभी तो तू मुझसे बाते करेगी

जिन्दगी अब हिला हिला के गुजरेगी
दो बूँद पी कर या पिला के गुजरेगी
ग्लास भरी ऐ मेरी जिन्दगी .........................

एक उत्तराखंडी

बालकृष्ण डी ध्यानी
देवभूमि बद्री-केदारनाथ
मेरा ब्लोग्स
http:// balkrishna_dhyani.blogspot.com
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बालकृष्ण डी ध्यानी
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