ये तो चलता है चलता रहेगा
मन ना खाली रहा है कभी ना ही ये मन यूँ ही भरेगा
मिलन जुदाई का सिलसिला चलता है सदियों से चलता रहेगा
ये तो चलता है चलता रहेगा
कभी तो आके कोई तो कहेगा रूठा हुआ है कभी तो मानेगा
सुख अब रोयेगा दुःख अब हंसेगा दूर खडा खडा वो अकेला हंसेगा
ये तो चलता है चलता रहेगा
खुशी है रंगों की नये उमंगों की कंही कोई सपना पलेगा कंही तो टूटेगा
कोई पराया लगेगा अपना कोई अपना पराया होगा
ये तो चलता है चलता रहे
समीप और दूरियों के बीच एक जंग छिड़ी तन्हाई कहनी लिखेंगी
दर्द उभरा है उस कोने से जो ठहरा है सदियों से सहार उस कंधे का उस कोर किनारे से बहेगा
ये तो चलता है चलता रहेगा
पर्वत और समतल जमीन बीच मतभेद पनपेगा एक दीवार खींची जायेगी
दरारें पड़ेगी कुछ इस तरह ना पर्वत संभलेगा ना समतल जमीन सह पायेगी
ये तो चलता है चलता रहेगा
फूलों के मौसम में अब पतझड़ के फुल खिलेंगे ,रोना जीवन है समझा पर वो भी हसेंगे
देख ना अब हम को उन नजरों से पहले मरते थे हम तुम पे अब ना हम मरेंगे
ये तो चलता है चलता रहेगा
मन ना खाली रहा है कभी ना ही ये मन यूँ ही भरेगा
मिलन जुदाई का सिलसिला चलता है सदियों से चलता रहेगा
ये तो चलता है चलता रहेगा
एक उत्तराखंडी
बालकृष्ण डी ध्यानी
देवभूमि बद्री-केदारनाथ
मेरा ब्लोग्स
http:// balkrishna_dhyani.blogspot.com
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बालकृष्ण डी ध्यानी


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