उन यादों में
चलो आज
यादों से कुछ बात हो जाये
उन रातों की मुलाकातों
से एक बार फिर मुलकात हो जाये
चलो आज ..............
मोड़ ले कुछ देर उनको उनके पास
जब वो रहते थे इन बाहों के पास
थोड़ा खोजा उन यादों में उनके पास हो जा
आँखों का नहीं ले बस मन का साथ
चलो आज ..............
मीठी मीठी खुशबु अब भी आती है
सौंदी मिट्टी के साथ वो मुस्कुराती है
उस पेड़ तले कभी बैठे थे हम
जीवन के संग जीने के सपने बुने थे हम
चलो आज ..............
आज कितनी दूर हम निकल आये
वो प्रेम वो स्नेह वंहा ही हम छोड़ आये
अब तो व्यस्तता है बस ये जीवन
जीना की सांसे जंहा हम छोड़ आये
चलो आज ..............
चलो आज
यादों से कुछ बात हो जाये
उन रातों की मुलाकातों
से एक बार फिर मुलकात हो जाये
चलो आज ..............
एक उत्तराखंडी
बालकृष्ण डी ध्यानी
देवभूमि बद्री-केदारनाथ
मेरा ब्लोग्स
http:// balkrishna_dhyani.blogspot.com
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बालकृष्ण डी ध्यानी


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