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समलौंण



समलौंण

दिखै कि ना तू किले दिखै तू
अपरों कि कथा लगै तू
रुप अनवर आणु तैम अपरू सी
अपरू किले लगे तू
दिखै कि ना तू किले दिखै तू .....

समलौंण...अ ..अ .. हो अ हो अ बस जी समलौंण

ऐ बाटा ऐ घाटा
छुचा तू भी छे ऐ माटा कू लाटू
बिगरेलु दिखेणु
अपरू पाड़ा माँ जमी पौद दिखे
लगे कि तू ना लगे तू

समलौंण...अ ..अ .. हो अ हो अ बस जी समलौंण

बिसरी गैना अपरी गैना
जो गै यख भ्तेक परती नी ऐना
कंन खाद पड़ी ऐ भूमी मा बल
फल लगे परै लोक मा
फल खै कि तू फल ना खिले तू

समलौंण...अ ..अ .. हो अ हो अ बस जी समलौंण

दिखै कि ना तू किले दिखै तू
अपरों कि कथा लगै तू
रुप अनवर आणु तैम अपरू सी
अपरू किले लगे तू
दिखै कि ना तू किले दिखै तू .....

एक उत्तराखंडी

बालकृष्ण डी ध्यानी
देवभूमि बद्री-केदारनाथ
मेरा ब्लोग्स
http:// balkrishna_dhyani.blogspot.com
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बालकृष्ण डी ध्यानी
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