पहाड़ों के बारे
पहाड़ों की रातें
पहाड़ों की बातें
कैसे कहें हम उन उजाड़ों की बातें
ना कोई फ़िक्र है
ना किस को खबर है
कैसे खोजें उन पहाड़ों की राहें
अपना ना रहा अपना
छोड़ा गया देश वो ढूढने सपना
कैसे चुने हम उन पहाड़ों के कांटे
हर आंख रोती है
बस एक बात पूछती है
कैसे पूरा करें इन पहाड़ों का सपना
दिल कचोटता है
हरदम ये सोचता है
मेरे अपने पहाड़ों के बारे
पहाड़ों की रातें
पहाड़ों की बातें
कैसे कहें हम उन उजड़ों की बातें
एक उत्तराखंडी
बालकृष्ण डी ध्यानी
देवभूमि बद्री-केदारनाथ
मेरा ब्लोग्स
http:// balkrishna_dhyani.blogspot.com
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बालकृष्ण डी ध्यानी


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