सुण हरये
सुण हरये सौंण कि कैल मी बुणों
भागा भागा भाग कि अब कथा सुणु
सुण हरये सौंण कि……………
हरालू पाखी येगै बण हारालू बुणों
छुंई अपरा अपरा मनखी थे ना धरु
सुण हरये सौंण कि……………
टिप टिप पाणी का धार गाल मा पडयु
विपदा खैरी का गीत अब तुम बी सुणु
सुण हरये सौंण कि……………
ऐगै ऐगै अचंण्च्क एक दैत सैर दूँण
अपरा अपरा अपरूं कि चिंता ना करो
सुण हरये सौंण कि……………
बैठा बैठा भैर बैठी कि खूब अब सोच्यु
जिबान ये जिवन कु कया मी करो
सुण हरये सौंण कि……………
सुण हरये सौंण कि कैल मी बुणों
भागा भागा भाग कि अब कथा सुणु
सुण हरये सौंण कि……………
एक उत्तराखंडी
बालकृष्ण डी ध्यानी
देवभूमि बद्री-केदारनाथ
मेरा ब्लोग्स
http:// balkrishna_dhyani.blogspot.com
में पूर्व प्रकाशित -सर्वाधिकार सुरक्षित
बालकृष्ण डी ध्यानी


0 टिप्पणियाँ