दीवारों में तेरा नाम
दीवारों में लिख लिख के
तेरा नाम …………३
रटता हूँ उसे
सुबह और शाम
दीवारों में लिख लिख के
तेरा नाम ………
सुबह वो ही
शाम भी वो ही
मेरा बस
अब काम भी वो ही
तेरा नाम …………३
दीवारों में लिख लिख के
तेरा नाम ……
तू आशिकी है मेरी
बंदगी है मेरी
गलियों में तेरी
बसी है खुदी मेरी
तेरा नाम …………३
दीवारों में लिख लिख के
तेरा नाम …
ना मंदिरों
ना अजानों में
मै उस खुदा को पाया
तेरे ठिकानों में
तेरा नाम …………३
दीवारों में लिख लिख के
तेरा नाम …
एक उत्तराखंडी
बालकृष्ण डी ध्यानी
देवभूमि बद्री-केदारनाथ
मेरा ब्लोग्स
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बालकृष्ण डी ध्यानी


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