रुणु छा हिमाल
मी बोल्दु तैसे
कया तुम म्यार दगडी चलदा
रुणु छा हिमाल .२
कया तुम वैनका आंसूं पुस्दा
मी बोल्दु तैसे ……….
बिराणु मुल्क
बिराणा अब तुम लक्दा
रुणु छा गढवाला . .२
कया तुम वैनका आंसूं पुस्दा
मी बोल्दु तैसे ……….
अपरू ही णी रहाई
गैरों ल ही अब आपरू बाणाई
रुणु छा कुमो . .२
कया तुम वैनका आंसूं पुस्दा
मी बोल्दु तैसे ……….
दिन बीती जाल
तुम बौडी कब आला
रुणु छा उत्तराखंड .२
कया तुम वैनका आंसूं पुस्दा
मी बोल्दु तैसे ……
मी बोल्दु तैसे
कया तुम म्यार दगडी चलदा
रुणु छा हिमाल .२
कया तुम वैनका आंसूं पुस्दा
मी बोल्दु तैसे ……….
एक उत्तराखंडी
बालकृष्ण डी ध्यानी
देवभूमि बद्री-केदारनाथ
मेरा ब्लोग्स
http:// balkrishna_dhyani.blogspot.com
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बालकृष्ण डी ध्यानी


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