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मन भितर


मन भितर

मन भितर कया छे छुची मी थे बोळ दे…२
सुदिना चुप रै छुची तू मी थे बोळ दे
मन भितर कया छे छुची मी थे बौळ दे

दोई दिना की दुनिया छे ई तू मुख खोल दे……२
मुख ण खोल्न तिल छुची आँखोंण बोळ दे
मन भितर कया छे छुची मी थे बौळ दे

मील बी मान ईं दुनिया च बली बुरी………२
कैल क्या बिगाड़ी तेरु तू मी थे हाक मार दे
मन भितर कया छे छुची मी थे बौळ दे

कैर ना शक कै पर बी तू नझरी से तौली दे ………२
दिलूं साथ आखेर तक तूं हां त बौळी दे
मन भितर कया छे छुची मी थे बौळ दे

मन भितर कया छे छुची मी थे बोळ दे…२
सुदिना चुप रै छुची तू मी थे बोळ दे
मन भितर कया छे छुची मी थे बौळ दे

एक उत्तराखंडी

बालकृष्ण डी ध्यानी
देवभूमि बद्री-केदारनाथ
मेरा ब्लोग्स
http:// balkrishna_dhyani.blogspot.com
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बालकृष्ण डी ध्यानी
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