आच रखडी कू तियोहर च
भूली मेरी दीदी मेरी
आच रखडी कू तियोहर च
बैठ्युं छोंऊँ बिदेश मा
रखडी की आस च
खुद लगी च तुमरी भैनी
बयां मेर कीलै उदस च
बैठ्युं छोंऊँ बिदेश मा
आच रखडी कू तियोहर च
आली चिठ्ठी पत्री भैनी की
हेर दूँ मी डकाबान च
बैठ्युं छोंऊँ बिदेश मा
रखडी की आस च
आली प्रीत भैनी की
ऊनों गेड़ों की तलास च
बैठ्युं छोंऊँ बिदेश मा
आच रखडी कू तियोहर च
खुदा आंदी भैनी की
यख य्खोली मी आच छोंऊँ
बैठ्युं छोंऊँ बिदेश मा
रखडी की आस च
भूली मेरी दीदी मेरी
आच रखडी कू तियोहर च
बैठ्युं छोंऊँ बिदेश मा
रखडी की आस च
एक उत्तराखंडी
बालकृष्ण डी ध्यानी
देवभूमि बद्री-केदारनाथ
मेरा ब्लोग्स
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बालकृष्ण डी ध्यानी


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