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आच रखडी कू तियोहर च


आच रखडी कू तियोहर च

भूली मेरी दीदी मेरी
आच रखडी कू तियोहर च
बैठ्युं छोंऊँ बिदेश मा
रखडी की आस च

खुद लगी च तुमरी भैनी
बयां मेर कीलै उदस च
बैठ्युं छोंऊँ बिदेश मा
आच रखडी कू तियोहर च

आली चिठ्ठी पत्री भैनी की
हेर दूँ मी डकाबान च
बैठ्युं छोंऊँ बिदेश मा
रखडी की आस च

आली प्रीत भैनी की
ऊनों गेड़ों की तलास च
बैठ्युं छोंऊँ बिदेश मा
आच रखडी कू तियोहर च

खुदा आंदी भैनी की
यख य्खोली मी आच छोंऊँ
बैठ्युं छोंऊँ बिदेश मा
रखडी की आस च

भूली मेरी दीदी मेरी
आच रखडी कू तियोहर च
बैठ्युं छोंऊँ बिदेश मा
रखडी की आस च

एक उत्तराखंडी

बालकृष्ण डी ध्यानी
देवभूमि बद्री-केदारनाथ
मेरा ब्लोग्स
http:// balkrishna_dhyani.blogspot.com
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बालकृष्ण डी ध्यानी
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