एक तू ही है
एक तू ही है
ना दुसरा कोई है
मन के इस मंदिर ………….२
भेद छुपा सा कोई है
एक तू ही है……
अंदर भी तू है
बाहर भी तू ही है
सृष्टी के कण कण में ………….२
तू है ना दूजा कोई है
एक तू ही है……
प्रभु मेरे है
बड़े दया निधान
आंखे खुलो मेरी ………….२
अपने चरणों के धाम
एक तू ही है……
रहा ना जाये मैल तनिक भी
बने मन निर्मल गंगा सार
बहते बहते भगवन ………….२
हो मेरा कल्याण
एक उत्तराखंडी
बालकृष्ण डी ध्यानी
देवभूमि बद्री-केदारनाथ
मेरा ब्लोग्स
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बालकृष्ण डी ध्यानी


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