कविता कुछ कहती है
मेर मन मेरे संग है
हर अंग वो थिरकती है
कविता कुछ कहती है
ना वो चुप रहती है...............
सुन ने वाले सुनाने वाले
को एक तार से जोड़ती है
कविता कुछ कहती है
ना वो चुप रहती है……………
भेद हैं उसके भाव हैं उसके
अभेद वो हरदम रहती
कविता कुछ कहती है
ना वो चुप रहती है……………
चंचल है स्थिर है वो
नित बहाव संग वो बहती है
कविता कुछ कहती है
ना वो चुप रहती है……………
मेर मन मेरे संग है
हर अंग वो थिरकती है
कविता कुछ कहती है
ना वो चुप रहती है……………
एक उत्तराखंडी
बालकृष्ण डी ध्यानी
देवभूमि बद्री-केदारनाथ
मेरा ब्लोग्स
http:// balkrishna_dhyani.blogspot.com
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बालकृष्ण डी ध्यानी


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