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छुंईं मा


छुंईं मा

छुंईं मा दाड़ी
कया वीं की छुंईं चा
छुंईं मा गिज्यूं
अब मेरु पहाड़ा चा
ये छुंईं मा दाड़ी ……………

एकली बी छे वा
छुंईं वीं का पास चा
कै मा ल्गाणी व्हाली वा
वीं छुंईं कि हाक चा

छुंईं मा दाड़ी
कया वीं की छुंईं चा
छुंईं मा गिज्यूं
अब मेरु पहाड़ा चा
ये छुंईं मा दाड़ी ……………

जख बी रै वा
छुंईं हिटे वीं का साथ चा
सींण उठा दा बैठा दा
वीं का ही रैबार चा

छुंईं मा दाड़ी
कया वीं की छुंईं चा
छुंईं मा गिज्यूं
अब मेरु पहाड़ा चा
ये छुंईं मा दाड़ी ……………

ईनी च्ल्दी रालो
वीं कि छुंईं कू गोंगाट चा
भली लगदी वा मीथे
जबैर छुंईं ल्गंदी मेरु साथ चा

छुंईं मा दाड़ी
कया वीं की छुंईं चा
छुंईं मा गिज्यूं
अब मेरु पहाड़ा चा
ये छुंईं मा दाड़ी ……………


एक उत्तराखंडी

बालकृष्ण डी ध्यानी
देवभूमि बद्री-केदारनाथ
मेरा ब्लोग्स
http:// balkrishna_dhyani.blogspot.com
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बालकृष्ण डी ध्यानी
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