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प्रणाम


प्रणाम

आज जन्म दिन हैं
मेरा
कैसे इसे मनाऊँ
सवेरे सवेरे उठकर
माता पिता के चरणों में
नतमत्स्क होकर
आशीष अपने से बड़ों का पाऊँ
एक अलग दिन
एक अलग साल है
एक नई सोच है
वही मेरे साथ पास है
ना ही कोई टॉफी लूंगा
ना ही कोइ केक काटूंगा
ना मोमबत्ती बुझाऊँगा
ना पेप्सी प्यास बुझाऊँगा
बस एक
दीप मै जलाऊँगा
उस लौ कि तरहा
इस जीवन का अँधेरा
दूर भगाऊँगा
उसकी तरह
मै भी झिलमिलाऊँगा
अनाथ पड़े
मेरे छूटे भाई बहनों को
एक छोटी सी
राशि देकर
उनका भविष्य
सुनहरा बनाऊंगा
बस इतनी इच्छा
पर
बस आप सबका
आशीष
इस शीश बनाये रखें

प्रणाम

एक उत्तराखंडी

बालकृष्ण डी ध्यानी
देवभूमि बद्री-केदारनाथ
मेरा ब्लोग्स
http:// balkrishna_dhyani.blogspot.com
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बालकृष्ण डी ध्यानी
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