देख लो जरा
देख लो जरा,मोड़ मोड़ के
एक बार जरा,देख लो जरा
छूटा पल खड़ा,वो बेकरार बड़ा
पीछे ही पड़ा ,देख लो जरा
कुछ तो बात है, क्यों यूँ वो अड़ा
क्या दे रहा सीख है ,देख लो जरा
जाते जाते उसने, कुछ तो होगा कहा
क्यों कर दिया अनसुना ,देख लो जरा
पल कि तो बात है, पल के बाद पल ही साथ
हर धड़कन पर उसका राज है ,देख लो जरा
ना कर अनसुना, तू भी अब गुनगुना
पल ने छेड़ा जो गीत है ,देख लो जरा
देख लो जरा,मोड़ मोड़ के
एक बार जरा,देख लो जरा
एक उत्तराखंडी
बालकृष्ण डी ध्यानी
देवभूमि बद्री-केदारनाथ
मेरा ब्लोग्स
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बालकृष्ण डी ध्यानी


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